(कवित्त)
भक्तों के विहार हेतु भारत-वसुंधरा पे,
साक्षात गोविन्द ने, गोलोक को उतारा है। [1]
सुषमा-सर-सरोज पारावार महिमा का,
रस का समुद्र है, आनंद व्योम तारा है॥ [2]
साधकों का भाव और हृदय सहृदयों का,
रसिकों के सरस, जीवन का सहारा है। [3]
पावन तपोवन है सच्चे प्रेम योगियों का,
वृन्दावन श्री का निकेतन रम्य प्यारा है॥ [4]
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (10)
भक्तों के विहार के लिए, भारत भूमि पर, श्री गोविंद ने स्वयं गोलोक को उतारा है। [1]
यह सुंदर कमलों का सरोवर है एवं महिमा का सागर है, यह रस का समुद्र है एवं आकाश में मानो चमकता हुआ आनंदमयी तारा है। [2]
यह भक्तों की भावनाओं का सार और सुकोमल जीवों का ह्रदय है, यह रसिकों के जीवन का मधुर सहारा है। [3]
यह भगवान के सच्चे प्रेमियों का पावन तपोवन है, यह वृंदावन, श्री राधा का सुंदर और अति प्रिय धाम है। [4]
भक्तों के विहार हेतु भारत-वसुंधरा पे,
साक्षात गोविन्द ने, गोलोक को उतारा है। [1]
सुषमा-सर-सरोज पारावार महिमा का,
रस का समुद्र है, आनंद व्योम तारा है॥ [2]
साधकों का भाव और हृदय सहृदयों का,
रसिकों के सरस, जीवन का सहारा है। [3]
पावन तपोवन है सच्चे प्रेम योगियों का,
वृन्दावन श्री का निकेतन रम्य प्यारा है॥ [4]
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (10)
भक्तों के विहार के लिए, भारत भूमि पर, श्री गोविंद ने स्वयं गोलोक को उतारा है। [1]
यह सुंदर कमलों का सरोवर है एवं महिमा का सागर है, यह रस का समुद्र है एवं आकाश में मानो चमकता हुआ आनंदमयी तारा है। [2]
यह भक्तों की भावनाओं का सार और सुकोमल जीवों का ह्रदय है, यह रसिकों के जीवन का मधुर सहारा है। [3]
यह भगवान के सच्चे प्रेमियों का पावन तपोवन है, यह वृंदावन, श्री राधा का सुंदर और अति प्रिय धाम है। [4]

