सुनी सुनी सब कोउ कहै, देखी कहै ने कोइ।
देखी कह, भगवतरसिक ताके पग पिय धोइ॥
- श्री भगवत रसिक जी, श्री भगवत रसिक जी की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (27)
संसार में अधिकांश लोग वेदों, शास्त्रों या अनुभवी महापुरुषों की बातों को बिना स्वयं अनुभव किए ही दोहराते रहते हैं। ऐसे व्यक्तियों की बातें प्रायः मिथ्या होती हैं। श्री भगवतरसिकजी कहते हैं कि हम तो उस व्यक्ति के चरण धोकर पीने को भी तत्पर हैं जो पहले परमार्थ का स्वयं अनुभव करे और फिर कुछ कहे।
देखी कह, भगवतरसिक ताके पग पिय धोइ॥
- श्री भगवत रसिक जी, श्री भगवत रसिक जी की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (27)
संसार में अधिकांश लोग वेदों, शास्त्रों या अनुभवी महापुरुषों की बातों को बिना स्वयं अनुभव किए ही दोहराते रहते हैं। ऐसे व्यक्तियों की बातें प्रायः मिथ्या होती हैं। श्री भगवतरसिकजी कहते हैं कि हम तो उस व्यक्ति के चरण धोकर पीने को भी तत्पर हैं जो पहले परमार्थ का स्वयं अनुभव करे और फिर कुछ कहे।

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