अब लगि मन कीन्हौ सोई , जो जो कह्यौ तैं मोहि ।
अब तू मेरौ कह्यौ करि, जुगल चरन छवि जोहि ॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (5)
हे मन ! अब तक तूने जो कहा, वही मैं करता रहा हूँ। अब तू मेरा इतना कहा मान ले कि तू श्री श्यामा-श्याम के चरणों का ध्यान-दर्शन करता रहेगा ।
अब तू मेरौ कह्यौ करि, जुगल चरन छवि जोहि ॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (5)
हे मन ! अब तक तूने जो कहा, वही मैं करता रहा हूँ। अब तू मेरा इतना कहा मान ले कि तू श्री श्यामा-श्याम के चरणों का ध्यान-दर्शन करता रहेगा ।

