नमो नमो वृंदाविपिन, नमो नमो सुखरास ।
नमो नमो ब्रजबासी जितै, तिन चरनन की आस ॥
- श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भ्राता), श्री प्रेम दास जी की वाणी (03)
मैं श्री वृंदावन धाम की परम पावन भूमि को बार-बार नमन करता हूँ, जो आनंद की राशि है । मैं सभी ब्रजवासियों को बार बार नमन करता हूँ, उन्हींके चरणों का मुझे आसरा है ।
नमो नमो ब्रजबासी जितै, तिन चरनन की आस ॥
- श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भ्राता), श्री प्रेम दास जी की वाणी (03)
मैं श्री वृंदावन धाम की परम पावन भूमि को बार-बार नमन करता हूँ, जो आनंद की राशि है । मैं सभी ब्रजवासियों को बार बार नमन करता हूँ, उन्हींके चरणों का मुझे आसरा है ।

