स्याम स्यामा, स्यामा स्याम - श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी

स्याम स्यामा, स्यामा स्याम - श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी

स्याम स्यामा, स्यामा स्याम ।
स्यामा स्याम ह्रदय महँ पूरन
स्यामा स्याम नैन अभिराम ॥ [1]
स्यामा स्याम सु जसु जग-पूरीत,
जोरी देखि लजित रति काम ।
"कृष्णदास" प्रभु गिरिधर स्यामा,
स्यामा स्याम रसिकता धाम ॥ [2]

- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी

श्यामा श्याम मेरे हृदय को पूरी तरह भर देते हैं भले ही उनका नाम कैसे भी लिया जाए (चाहे श्याम श्यामा अथवा श्यामा श्याम)। श्यामा श्याम मेरे नेत्रों के लिए अत्यंत मनोहर दृश्य हैं। [1]

श्यामा-श्याम का यश पूरे संसार में फैला हुआ है। श्यामा श्याम की जोड़ी को निहार कर रति-कामदेव भी लज्जित हो जाते हैं । श्री कृष्णदास कहते हैं, गिरिधर (कृष्ण) और श्यामा (राधा) दिव्य प्रेम के सार का प्रतीक हैं, जो रसिकता की चरम सीमा है। [2]