ब्रज में मुख्यतः 5 महादेव विराजमान हैं। मथुरा में भूतेश्वर महादेव, वृन्दावन में गोपीश्वर महादेव, कामां (काम्यवन) में कामेश्वर महादेव, नंदगांव में नंदीश्वर महादेव (आसेश्वर महादेव) एवं गोवर्धन में चक्रेश्वर महादेव (चकलेश्वर महादेव)।
चक्रतीर्थं नमस्तुभ्यं कृष्णचक्रेण लाञ्छितम्।
सर्वपापच्छिदे तस्मै कृष्णनिर्मल निर्मितम्॥
- वायु पुराण
हे श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र से सुशोभित चक्रतीर्थ, मैं आपको नमस्कार करता हूं। यह तीर्थ समस्त पापों का नाश करनेवाला है जिसे श्री कृष्ण ने स्थापित किया है।
जब देवराज इंद्र क्रोध के वशीभूत होकर ब्रजमण्डल को जल में डुबाने के लिए प्रलयकारी वर्षा करने लगे। तब ब्रज की रक्षा करने के लिए श्री कृष्ण ने अपनी कनिष्ठ ऊँगली के नखाग्र पर गोवर्धन पर्वत को धारण किया एवं सुदर्शन चक्र को पर्वत के ऊपर स्थित रहकर जल रोकने की आज्ञा की एवं भगवान शिव से जल को अपनी जटाओं में धारण कर ब्रज भूमि को सूखाने की प्रार्थना की। सुदर्शन चक्र गोवर्धन पर्वत के ऊपर स्थित होकर जल रोकने लगे तथा जल को सूखाने लगे। लेकिन प्रलयकारी मेघों द्वारा मूसलाधार वर्षा के कारण सुदर्शन चक्र से भी जल पूरी तरह से सुखाया न गया। तब भगवान शिव ने सम्पूर्ण जल को अपनी जटाओं में धारण कर लिया एवं भूमि सूख गयी। सुदर्शन चक्र को यह अभिमान हो गया की उनके द्वारा ही जल सूख गया नहीं तो ब्रज डूब जाता। सुदर्शन चक्र के इस अभिमान को देखकर श्री कृष्ण ने उनसे कहा कि "हे सुदर्शन, तुम व्यर्थ में ही अभिमान कर रहे हो। भगवान शिव ने ही सम्पूर्ण जल को अपनी जटाओं में धारण किया है एवं ब्रज को सुखाया है।" ऐसा कहकर श्री कृष्ण ने भगवान शिव को यहाँ चक्रेश्वर महादेव अर्थात चक्र के ईश्वर के रूप में स्थापित किया।
कालांतर में श्री कृष्ण के पपौत्र श्री वज्रनाभ जी ने यहाँ शिव लिंग की स्थापना कर श्री चक्रेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की।
चक्रेश्वर महादेव मंदिर के सामने ही श्री सनातन गोस्वामी जी की भजन कुटी स्थित है जहाँ उन्होंने कुछ वर्ष रहकर भजन किया था।
चक्रेश्वर महादेव मंदिर के सामने ही स्थित है - श्री गौर नित्यानन्द प्रभु का मन्दिर। श्री चैतन्य महाप्रभु और श्री नित्यानन्द प्रभु ने श्री गिरिराज जी की परिक्रमा करते समय श्री चक्रेश्वर महादेव का दर्शन करके व मानसी गंगा, पारंग घाट के दर्शन करके यहाँ विश्राम किया था।
ऐसी अनुश्रुति है कि एक बार श्री सनातन गोस्वामी ने यहाँ मशकों (मच्छरों) से पीड़ित होकर स्थानान्तरण करने का विचार किया, तब स्वयं भगवान् चक्रेश्वर ने इनको आश्वासन दिया कि आज के बाद इस स्थान पर मशकों का कोई उत्पात नहीं होगा, अतः श्री सनातन गोस्वामी ने फिर गमन प्रस्ताव छोड़ दिया।
स्थान :
श्री चक्रेश्वर महादेव गोवर्धन में मानसी गंगा के उत्तर दिशा में स्थित हैं।
चक्रतीर्थं नमस्तुभ्यं कृष्णचक्रेण लाञ्छितम्।
सर्वपापच्छिदे तस्मै कृष्णनिर्मल निर्मितम्॥
- वायु पुराण
हे श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र से सुशोभित चक्रतीर्थ, मैं आपको नमस्कार करता हूं। यह तीर्थ समस्त पापों का नाश करनेवाला है जिसे श्री कृष्ण ने स्थापित किया है।
जब देवराज इंद्र क्रोध के वशीभूत होकर ब्रजमण्डल को जल में डुबाने के लिए प्रलयकारी वर्षा करने लगे। तब ब्रज की रक्षा करने के लिए श्री कृष्ण ने अपनी कनिष्ठ ऊँगली के नखाग्र पर गोवर्धन पर्वत को धारण किया एवं सुदर्शन चक्र को पर्वत के ऊपर स्थित रहकर जल रोकने की आज्ञा की एवं भगवान शिव से जल को अपनी जटाओं में धारण कर ब्रज भूमि को सूखाने की प्रार्थना की। सुदर्शन चक्र गोवर्धन पर्वत के ऊपर स्थित होकर जल रोकने लगे तथा जल को सूखाने लगे। लेकिन प्रलयकारी मेघों द्वारा मूसलाधार वर्षा के कारण सुदर्शन चक्र से भी जल पूरी तरह से सुखाया न गया। तब भगवान शिव ने सम्पूर्ण जल को अपनी जटाओं में धारण कर लिया एवं भूमि सूख गयी। सुदर्शन चक्र को यह अभिमान हो गया की उनके द्वारा ही जल सूख गया नहीं तो ब्रज डूब जाता। सुदर्शन चक्र के इस अभिमान को देखकर श्री कृष्ण ने उनसे कहा कि "हे सुदर्शन, तुम व्यर्थ में ही अभिमान कर रहे हो। भगवान शिव ने ही सम्पूर्ण जल को अपनी जटाओं में धारण किया है एवं ब्रज को सुखाया है।" ऐसा कहकर श्री कृष्ण ने भगवान शिव को यहाँ चक्रेश्वर महादेव अर्थात चक्र के ईश्वर के रूप में स्थापित किया।
कालांतर में श्री कृष्ण के पपौत्र श्री वज्रनाभ जी ने यहाँ शिव लिंग की स्थापना कर श्री चक्रेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की।
चक्रेश्वर महादेव मंदिर के सामने ही श्री सनातन गोस्वामी जी की भजन कुटी स्थित है जहाँ उन्होंने कुछ वर्ष रहकर भजन किया था।
चक्रेश्वर महादेव मंदिर के सामने ही स्थित है - श्री गौर नित्यानन्द प्रभु का मन्दिर। श्री चैतन्य महाप्रभु और श्री नित्यानन्द प्रभु ने श्री गिरिराज जी की परिक्रमा करते समय श्री चक्रेश्वर महादेव का दर्शन करके व मानसी गंगा, पारंग घाट के दर्शन करके यहाँ विश्राम किया था।
ऐसी अनुश्रुति है कि एक बार श्री सनातन गोस्वामी ने यहाँ मशकों (मच्छरों) से पीड़ित होकर स्थानान्तरण करने का विचार किया, तब स्वयं भगवान् चक्रेश्वर ने इनको आश्वासन दिया कि आज के बाद इस स्थान पर मशकों का कोई उत्पात नहीं होगा, अतः श्री सनातन गोस्वामी ने फिर गमन प्रस्ताव छोड़ दिया।
स्थान :
श्री चक्रेश्वर महादेव गोवर्धन में मानसी गंगा के उत्तर दिशा में स्थित हैं।

