न पापेभ्यो भयं यत्र - स्कंद पुराण, मथुरा माहात्म्यम् (2.5.17.46)

न पापेभ्यो भयं यत्र - स्कंद पुराण, मथुरा माहात्म्यम् (2.5.17.46)

न पापेभ्यो भयं यत्र न भयं यत्र वै यमात् ।
न गर्भवासभीर्यत्र तत्क्षेत्रं को न संश्रयेत् ॥

- स्कंद पुराण, मथुरा माहात्म्यम् (2.5.17.46)

जहाँ पापों का भय नहीं है, जहाँ यमराज (मृत्यु) का भय नहीं है, और जहाँ गर्भवास का भय नहीं है, ऐसे दिव्य मथुरा क्षेत्र (ब्रज) की शरण कौन नहीं लेगा?