नेह तजौ घर की घरन, सेवक छाड़ौ पास।
श्री वृंदावन छांड़ि कै, अनत करौ नहीं वास॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (15)
हे मन! घर-परिवार के मोह को छोड़ दे, और सेवकों का साथ भी त्याग दे। मेरी यही प्रतिज्ञा है कि मैं श्रीधाम वृंदावन को छोड़कर अन्यत्र नहीं वास करूँगा।
श्री वृंदावन छांड़ि कै, अनत करौ नहीं वास॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (15)
हे मन! घर-परिवार के मोह को छोड़ दे, और सेवकों का साथ भी त्याग दे। मेरी यही प्रतिज्ञा है कि मैं श्रीधाम वृंदावन को छोड़कर अन्यत्र नहीं वास करूँगा।

