मधुर केलिरस-झेलि सों - श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (69)

मधुर केलिरस-झेलि सों - श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (69)

मधुर केलिरस-झेलि सों, रसना स्वाद-सुरूप।
सुफल सुबानी बेलि को, राधा नाम अनूप॥

- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (69)

प्रिया प्रीतम की केली लीलाओं के मधुर रस में डूबकर, रसना दिव्य "राधा" नाम का अति अद्भुत आनंद लेती है, जो मनमोहक वाणी रूपी लता का ऐसा सुफल (सुंदर फल) है, जिसका रस अद्वितीय है और जिसकी कोई तुलना नहीं की जा सकती।