मुयें दुखी जीवत दुखी, दुखी जु भूप आहार।
साधु सुखी “सहजो” कहै, पायो नित्यबिहार॥
- श्री सहजोबाई
मनुष्य मरते हुए भी दुःखी एवं जीते हुए भी दुःखी रहता है, सब साधनों से युक्त राजा भी दुखी रहता है। श्री सहजोबाई कहती हैं कि केवल साधु ही सुखी है, जिसने नित्यविहार पा लिया है।
साधु सुखी “सहजो” कहै, पायो नित्यबिहार॥
- श्री सहजोबाई
मनुष्य मरते हुए भी दुःखी एवं जीते हुए भी दुःखी रहता है, सब साधनों से युक्त राजा भी दुखी रहता है। श्री सहजोबाई कहती हैं कि केवल साधु ही सुखी है, जिसने नित्यविहार पा लिया है।

