अद्भुत रुचि सखि प्रेम की, सहज परस्पर होय।
जैसें एकहि रंग सौं, भरिये सीसी दोय॥
- ब्रज के दोहे
हे सखी, यह दिव्य प्रेम की अद्भुत रुचि सहज ही इन दोनों (प्रिया-प्रियतम) में रहती है। प्रिया और प्रियतम अभेद हैं, ऐसा लगता है मानो एक ही रंग की दो शीशियाँ भरी हुई हैं।
जैसें एकहि रंग सौं, भरिये सीसी दोय॥
- ब्रज के दोहे
हे सखी, यह दिव्य प्रेम की अद्भुत रुचि सहज ही इन दोनों (प्रिया-प्रियतम) में रहती है। प्रिया और प्रियतम अभेद हैं, ऐसा लगता है मानो एक ही रंग की दो शीशियाँ भरी हुई हैं।

