त्वमप्येतां समाश्रित्य - सनत्कुमार संहिता (36.174)

त्वमप्येतां समाश्रित्य - सनत्कुमार संहिता (36.174)

त्वमप्येतां समाश्रित्य राधिकांममवल्लभाम्‌।
जपन्मे युगलं मन्त्रं सदातिष्ठ ममालये॥

- सनत्कुमार संहिता (36.174)

श्री कृष्ण श्री शिवजी से कहते हैं – हे शिव! तुम भी मेरी प्रिया वल्लभा श्री राधिका का आश्रय लेकर, मेरे युगल मंत्र का जप करते हुए, सदा मेरे आलय (घर) श्री वृंदावन में ही रहना।