महिमा तेरी कहा कहूँ - श्री अनन्य अलि

महिमा तेरी कहा कहूँ - श्री अनन्य अलि

महिमा तेरी कहा कहूँ, श्रीहरिवंश दयाल।
तेरे द्वारे बँटत हैं, सहज लाड़िली लाल॥

- श्री अनन्य अलि

हे दयालु श्री हरिवंश! मैं आपकी महिमा कहाँ तक कहूँ, क्योंकि आपके द्वार पर तो सहज ही लाड़िली लाल (श्री श्यामा-श्याम) सबको सुलभ हो जाते हैं।