बहुत दिना भटकट फिर्यो, कछु ना आयो साथ।
श्री वल्लभ सुमर्यो तबे, पर्यो पदारथ हाथ॥
- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (10)
बहुत दिनों तक नाना प्रकार की साधनाओं में भटकता रहा, परंतु उससे कल्याण संभव नहीं हुआ। लेकिन जब से श्री कृष्ण का मन से स्मरण और भक्ति की, तभी से हृदय को शांति मिली और आध्यात्मिक जगत की शुद्ध वस्तु का बोध हो सका।
श्री वल्लभ सुमर्यो तबे, पर्यो पदारथ हाथ॥
- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (10)
बहुत दिनों तक नाना प्रकार की साधनाओं में भटकता रहा, परंतु उससे कल्याण संभव नहीं हुआ। लेकिन जब से श्री कृष्ण का मन से स्मरण और भक्ति की, तभी से हृदय को शांति मिली और आध्यात्मिक जगत की शुद्ध वस्तु का बोध हो सका।

