रा अक्षर को सुनत ही - ब्रज के दोहे

रा अक्षर को सुनत ही - ब्रज के दोहे

रा अक्षर को सुनत ही, प्रीतम मन ललचाये।
धा अक्षर कानन घुसैं, सों हिये परमानन्द पाय॥

- ब्रज के दोहे

जब श्री कृष्ण किसी के मुख से “रा” अक्षर को सुनते हैं, तो उनका मन मोहित हो जाता है। जैसे ही वे पुनः “धा” अक्षर सुनते हैं, उनका ह्रदय प्रेमानंद में डूब जाता है।