श्रीस्वामी हरिदास के, ते प्रगट जगत जस जानि।
सैवै नित्य बिहार कों, तजि लोक वेद की कानि॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (437)
श्री स्वामी हरिदास जी के जो अनन्य जन हैं, उनका यह यश जगत में विख्यात है कि वे लोक-वेद की समस्त मर्यादाओं को त्यागकर, सदैव एकमात्र सर्वोपरि नित्यविहार का ही दृढ़ अनन्य भाव से सेवन करते हैं।

