जब लग सहज न बदलई, फुरै न जहाँ-तहाँ भाव - श्री नेह नागरीदास जी की वाणी, दोहावली (1)

जब लग सहज न बदलई, फुरै न जहाँ-तहाँ भाव - श्री नेह नागरीदास जी की वाणी, दोहावली (1)

जब लग सहज न बदलई, फुरै न जहाँ-तहाँ भाव।
पंथ पावनौ कठिन है, कीन्हे कहा बनाव॥

- श्री नेह नागरीदास, श्री नेह नागरीदास जी की वाणी,दोहावली (1)

जब तक स्वभाव नहीं बदलता एवं ह्रदय में भाव स्थिर नहीं हो जाता तब तक प्रेम पंथ का पाना कठिन है । बनावट करने से कोई कार्य सिद्ध नहीं होता ।