वृंदावनपरित्यागो गोविंदस्य न विद्यते।
अन्यत्र यद्वपुस्ततु कृत्रिमं तन्न संशयः॥
- पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 77 (श्री कृष्ण का वर्णन), छंद (61)
श्री वृंदावन धाम को गोविंद कभी भी त्याग नहीं करते। अन्यत्र जगह जैसे मथुरा और द्वारका में जो उनका शरीर दृष्टिकर होता है वह कृतिम है, बनावटी है । इसमें तनिक भी संशय नहीं है ।
अन्यत्र यद्वपुस्ततु कृत्रिमं तन्न संशयः॥
- पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 77 (श्री कृष्ण का वर्णन), छंद (61)
श्री वृंदावन धाम को गोविंद कभी भी त्याग नहीं करते। अन्यत्र जगह जैसे मथुरा और द्वारका में जो उनका शरीर दृष्टिकर होता है वह कृतिम है, बनावटी है । इसमें तनिक भी संशय नहीं है ।

