वंदौं सुमति रसज्ञ जन, अति करुणाके ऐन।
वाणी दंपति मिलनकौं, जिनन बनाये नैन॥
- श्री हित वृन्दावन दास जी
मैं उन सुंदर मति वाले, रसमर्मज्ञ करुणा धाम रसिक जनों की वंदना करता हूँ, जिन्होंने युगल श्री श्यामा श्याम के मिलन हेतु वाणी रूपी नेत्र बनाये हैं अर्थात् जिनकी वाणी युगल स्वरूप के दर्शन कराने में सक्षम है।

