सखी भाव राधा भजे सो पहुँचै निज धाम - श्री अखैराम जी (शुक संप्रदाय के रसिक भक्त)

सखी भाव राधा भजे सो पहुँचै निज धाम - श्री अखैराम जी (शुक संप्रदाय के रसिक भक्त)

सखी भाव राधा भजे, सो पहुँचै निज धाम ।
टहल लहै सामीपता, अति रीझै घनश्याम ॥

- श्री अखैराम जी (शुक संप्रदाय के रसिक भक्त)

जो सखी भाव धारण कर श्री राधा का अनन्य भजन करता है, वह निश्चित ही प्रिया-प्रियतम (श्री राधा-कृष्ण) के निज धाम में पहुँचता है। उस सौभाग्यशाली जीव को श्री राधा की निज सेवा प्राप्त होती है, और इस सेवा से श्री कृष्ण उससे अत्यधिक प्रसन्न हो जाते हैं ।