जिह्वा केवल रट रही - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, श्याम शतक (41)

जिह्वा केवल रट रही - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, श्याम शतक (41)

जिह्वा केवल रट रही, राधे राधे श्याम।
मन कुछ सोचै और तौ, सुमिरण है बेकाम॥

- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, श्याम शतक (41)

यदि जिह्वा केवल “राधे श्याम" आदि नाम रट रही है और मन का चिंतन भगवान में नहीं है तो ऐसा सुमिरन किसी काम का नहीं है।