प्यारे वृन्दावन के रूख ।
कोटि गाय बाँझन हत शाखा तोरत हरिहिं विदूख ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्ध (10)
श्री वृंदावन धाम के वृक्ष श्री हरि को अत्यंत प्यारे हैं । इन वृक्षों की शाखा तोड़ने से श्री हरि को कोटि गौ हत्या से भी अधिक कष्ट होता है ।
कोटि गाय बाँझन हत शाखा तोरत हरिहिं विदूख ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्ध (10)
श्री वृंदावन धाम के वृक्ष श्री हरि को अत्यंत प्यारे हैं । इन वृक्षों की शाखा तोड़ने से श्री हरि को कोटि गौ हत्या से भी अधिक कष्ट होता है ।

