ललितमोहिनी कृपा करी - श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (13)

ललितमोहिनी कृपा करी - श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (13)

ललितमोहिनी कृपा करी, निरखे स्यामास्याम।
चतुरदास सब छाँड़िके, भजि वृन्दावन धाम॥

- श्री चतुर दास जी, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (13)

श्री चतुरदास जी कहते हैं कि उनके गुरुदेव श्री ललित मोहिनीदास जी की कृपा से, वे नित्य विहार पारायण श्यामा कुंजबिहारी को निरखते हैं । समस्त सांसारिक द्वन्दों को त्याग कर, श्री वृंदावन धाम का आश्रय ग्रहण कर, अनन्य भजन करना ही इसका एक मात्र उपाय है ।