सब तें कठिन उपासना, प्रेम-पंथ रस-रीति।
राई सम जो चलै मन, छूटि जाइ 'ध्रुव' प्रीति॥
- श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, श्रृंगार शत (3.51)
प्रेम-मार्गीय रस-रीति की उपासना सब उपासनाओं से कठिन है। श्री ध्रुवदास जी कहते हैं कि राई के समान किंचित भी मन के विचलन से प्रेम प्रीति में अन्तराय पड़ जाता है।

