मैंने रटना लगाई रे राधा नाम की - श्री हित गोपाल दास

मैंने रटना लगाई रे राधा नाम की - श्री हित गोपाल दास

मैंने रटना लगाई रे राधा नाम की॥
मेरी पलकों में राधा, मेरी अलकों में राधा,
मैंने माँग भराई रे राधा नाम की। [1]
मेरे नैनों में राधा, मेरे बैनों में राधा,
मैंने बैनी गुथाई रे, राधा नाम की॥ [2]
मेरी दुलरी में राधा, मेरी चुनरी में राधा,
मैंने नथनी सजाई रे, राधा नाम की। [3]
मेरे चलने में राधा, मेरे हलने में राधा,
कटि किंकणी बजाई रे, राधा नाम की॥ [4]
मेरे दाँये बाँये राधा, मेरे आगे पीछे राधा,
रोम रोम रस छाई रे, राधा नाम की। [5]
मेरे अंग अंग राधा, मेरे संग संग राधा,
'गोपाल' बंशी बजाई रे, राधा नाम की॥ [6]

- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले]

मैंने निरंतर श्री राधा नाम की रटना लगायी है ।
मेरी पलकों में एवं अलकों में श्री राधा है, मैंने अपनी माँग श्री राधा नाम से भर ली है। [1]

मेरी आँखों में एवं मेरी वाणी में श्री राधा विराजमान है, मैंने अपनी वेणी श्री राधा नाम से गुंथी है। [2]

मेरी दुलरी एवं चुनरी में श्री राधा विराजित है, मैंने श्री राधा नाम की नथनी धारण की है। [3]

मेरे चलने एवं हिलने में भी श्री राधा विराज रही है, मैंने कटी-किंकणी भी श्री राधा नाम की धारण की है। [4]

मेरे दाँये-बाँये भी श्री राधा है एवं आगे-पीछे भी श्री राधा विराजित है, मेरे रोम-रोम में श्री राधा नाम रस छाया हुआ है। [5]

मेरे अंग-अंग में श्री राधा समाया है, मेरे संग-संग श्री राधा है । श्री गोपाल दास जी कहते हैं कि श्री कृष्ण भी वंशी में श्री राधा नाम ही गाते हैं । [6]