धन धन वृन्दावन की गैयाँ - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (57)

धन धन वृन्दावन की गैयाँ - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (57)

धन धन वृन्दावन की गैयाँ।
जिनको कृष्ण चरावत डोलैं, फिरैं आप पगपैयाँ॥[1]
जमुना तीर नीर कौं धावैं, बैठी कदम्ब की छैयाँ।
अभयराम येहू बड़भागिनी, भई कृष्ण की मैयाँ॥ [2]

- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (57)

धन्य धन्य हैं श्री वृंदावन की गायें, जिन्हें स्वयं श्री कृष्ण नंगे पैरों से चराने ले जाते हैं। [1]

वे यमुना के तट पर पानी पीने पीने जाती हैं और कदंब के वृक्षों की छाया में बैठती हैं। श्री अभयराम जी कहते हैं, “ये गायें अत्यंत भाग्यशाली हैं जिन्हें श्री कृष्ण ने अपनी माँ माना है ।” [2]