धनि धनि धनि बृन्दाविपिन - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (5)

धनि धनि धनि बृन्दाविपिन - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (5)

धनि धनि धनि बृन्दाविपिन, सब सुखमा की खान।
गौर श्याम बिहरत जहां, रसिकन जीवन प्रान॥

- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (5)

श्री वृंदावन धाम धन्य-धन्य है, यह समस्त सुखों की खान है, जहाँ गौर-श्यामल वर्ण वाले, रसिकों के जीवन-प्राण, श्री राधा-कृष्ण सदा नित्य विहार में मग्न रहते हैं।