या छवि की उपमा को दीजै।
शोभित रंग भरे आभूषण, निरखि-निरखि आनन्द सुख लीजै॥ [1]
आनन्द-मूरति, रूप-सुधानिधि, ए गति सब दिन देखिवौ कीजै।
चन्द सखी हित बालकृष्ण प्रभु, प्रेम-समूह दृगनि भरि पीजै॥ [2]
- श्री चंद्र सखी जी
दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण की मधुर छवि की उपमा किससे दी जाए ?
उनके अंगों पर सुन्दर विविध रंगों के आभूषण सुशोभित हैं, जिन्हें देख-देख कर आनंद लीजिए। [1]
वे दोनों आनंद की मूर्ति एवं रूपसुधा की निधि हैं जिनका दर्शन सब दिन, नित्य प्रति करना चाहिए ।श्री चन्द्र सखी जी कहती हैं कि उनके गुरुदेव श्री हित बाल कृष्ण जी की कृपा से उनके नेत्र प्रेम रस का भर-भर कर पान करते रहते हैं । [2]
शोभित रंग भरे आभूषण, निरखि-निरखि आनन्द सुख लीजै॥ [1]
आनन्द-मूरति, रूप-सुधानिधि, ए गति सब दिन देखिवौ कीजै।
चन्द सखी हित बालकृष्ण प्रभु, प्रेम-समूह दृगनि भरि पीजै॥ [2]
- श्री चंद्र सखी जी
दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण की मधुर छवि की उपमा किससे दी जाए ?
उनके अंगों पर सुन्दर विविध रंगों के आभूषण सुशोभित हैं, जिन्हें देख-देख कर आनंद लीजिए। [1]
वे दोनों आनंद की मूर्ति एवं रूपसुधा की निधि हैं जिनका दर्शन सब दिन, नित्य प्रति करना चाहिए ।श्री चन्द्र सखी जी कहती हैं कि उनके गुरुदेव श्री हित बाल कृष्ण जी की कृपा से उनके नेत्र प्रेम रस का भर-भर कर पान करते रहते हैं । [2]

