व्रजराज सुतो वृन्दावने पूर्णतमो वसन्।
सम्पूर्ण षोडश कलो विहारं कुरुते सदा॥
- सनत्कुमार संहिता (36.291)
व्रजराज नंदनंदन श्री कृष्णचन्द्र पूर्णतम स्वरूप से श्री वृंदावन धाम में सदा वास करते हैं जहां वे सोलह कलाओं से युक्त होकर नित्य विहार करते हैं ।
सम्पूर्ण षोडश कलो विहारं कुरुते सदा॥
- सनत्कुमार संहिता (36.291)
व्रजराज नंदनंदन श्री कृष्णचन्द्र पूर्णतम स्वरूप से श्री वृंदावन धाम में सदा वास करते हैं जहां वे सोलह कलाओं से युक्त होकर नित्य विहार करते हैं ।

