प्यारी जी तिहारे बिन कल न परत है।
मंदिर अटारी चित्रसारी और फुलवारी,
मोहि कछु प्रिय न लगत है॥ [1]
घनो समझायो इत उत बहलायो पुनि,
तौहू मन धीर न धरत है।
एतौ हठ आगे कब कियो नारायण,
जेतौ हठ आज तू करत है॥ [2]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, सम्भ्रम-मानलीला (16)
श्री लाल जी कहते हैं:
हे प्यारी जू [श्री राधा], आपके बिना मुझे एक क्षण को भई चैन नहीं मिलता।
मंदिर, अटारी, सुंदर चित्रों से सजी फुलवारी—इनमें से कोई भी मुझे प्रिय नहीं लगता। [1]
मैंने इस मन को बहुत समझाया, इधर-उधर बहलाने का बहुत प्रयास किया गया, फिर भी मेरा मन धैर्य नहीं धरता।
हे प्यारी जू ऐसा हठ (मान) तो आपने आज तक नहीं किया था, जैसा हठ आप आज कर रही हो। [2]
मंदिर अटारी चित्रसारी और फुलवारी,
मोहि कछु प्रिय न लगत है॥ [1]
घनो समझायो इत उत बहलायो पुनि,
तौहू मन धीर न धरत है।
एतौ हठ आगे कब कियो नारायण,
जेतौ हठ आज तू करत है॥ [2]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, सम्भ्रम-मानलीला (16)
श्री लाल जी कहते हैं:
हे प्यारी जू [श्री राधा], आपके बिना मुझे एक क्षण को भई चैन नहीं मिलता।
मंदिर, अटारी, सुंदर चित्रों से सजी फुलवारी—इनमें से कोई भी मुझे प्रिय नहीं लगता। [1]
मैंने इस मन को बहुत समझाया, इधर-उधर बहलाने का बहुत प्रयास किया गया, फिर भी मेरा मन धैर्य नहीं धरता।
हे प्यारी जू ऐसा हठ (मान) तो आपने आज तक नहीं किया था, जैसा हठ आप आज कर रही हो। [2]

