रसिक रीति अद्भुत कथी - श्री रसिक देव जी की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (18)

रसिक रीति अद्भुत कथी - श्री रसिक देव जी की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (18)

रसिक रीति अद्भुत कथी, कुंज केलि रस रास।
श्री नरहरिदास प्रताप तैं, रसिकनि दियौ निवास॥

- श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (18)

श्री श्यामा कुंजबिहारी की दिव्य केली-रस में डूबे हुए रसिकों द्वारा अपनाई गई यह रस-रीति अत्यंत ही अद्भुत है। श्री रसिक देव जी कहते हैं कि श्री नरहरिदास जी की कृपा और प्रताप से ही रसिकों के संग उन्हें इस प्रेममय धाम में निवास का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।