बरसाने रस-सिंधु तें प्रगटी राधा-रत्न - श्री हित परमानंद दास जी

बरसाने रस-सिंधु तें प्रगटी राधा-रत्न - श्री हित परमानंद दास जी

बरसाने रस-सिंधु तें, प्रगटी राधा-रत्न।
‘हित-परमानंद’ प्रीति सौं, हिय राखौ करि जत्न ॥

- श्री हित परमानंद दास जी

बरसाना रूपी रस-सागर से श्री राधा रूपी अनमोल रत्न प्रकट हुआ है। श्री हित परमानंद दास जी कहते हैं, “पूर्ण प्रयास और प्रेम से इस अमूल्य रत्न को अपने हृदय में सदा के लिए धारण करो।”