इत उत मन भटकै नहीं फँसे न माया जाल - ब्रज के दोहे

इत उत मन भटकै नहीं फँसे न माया जाल - ब्रज के दोहे

इत उत मन भटकै नहीं, फँसे न माया जाल ।
चरण कमल में चित्त रमें, हे करुणासिंधु कृपाल ॥

- ब्रज के दोहे

ऐसी कृपा हो कि अब मेरा मन इधर उधर न भटके और न ही मायाजाल में फँसे । हे करुणा सिंधु, परम कृपालु श्री राधा! अब मेरा चित्त केवल आपके चरण कमलों में ही रमा करे ।