लग्यो झांकन नित्य बिहारहि मैं - श्री प्रेम जी

लग्यो झांकन नित्य बिहारहि मैं - श्री प्रेम जी

(सवैया)
लग्यो झांकन नित्य बिहारहि मैं, हरिदास कृपासौं छबि ये निहारी। [1]
ललिते एकसेज सजाई सखी, तन सान्यो सोयो ढिंग प्यारी बिहारी॥ [2]
पदगान अलौकिक स्वामी करें, प्यारे प्यारी लखें हरिदास दुलारी। [3]
सखीभाव सौं 'प्रेम' पुजारी पूजें, निरत नित्यबिहारमें बाँकेबिहारी॥ [4]

- श्री प्रेम जी

श्री स्वामी हरिदास जी की कृपा से मैं प्रिया-प्रियतम के नित्य विहार की झांकी निहार रहा हूँ। [1]

श्री ललिता सखी ने एक सुंदर सेज सजाई है जिस पर श्री श्यामा-कुंजबिहारी परस्पर आबद्ध पौढ़े हुए हैं। [2]

श्री स्वामी हरिदास जी अलौकिक पदगान कर रहे हैं, और हरिदासी जी के दुलारे रसिकजन प्यारे-प्यारी को अनवरत निहार रहे हैं। [3]

श्री प्रेम जी कहते हैं कि नित्य विहार में बाँके बिहारी को प्रेम के पुजारी रसिकजन सखीभाव से पूज रहे हैं। [4]