जो वन वन डोलत रहों, बाँध मिलन की फेंट।
अन जाने ही होयगी, कहूँ अचानक भेंट॥
- श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (30)
यदि कोई जीव श्री श्यामाश्याम से मिलने की आशा बाँधकर वृन्दावन के कुंज वनों में डोलेगा, तो अनजाने में ही कहीं न कहीं उसकी उनसे अचानक भेंट अवश्य होगी।

