(सवैया)
द्रोपदी औ गणिका हू अजामिल, शोक हर्यो जब नेक निहारो। [1]
गौतमनारी तरी ध्रुव औ, प्रह्लादको दुक्ख हर्यो अति भारो॥ [2]
काहे को सोच करै 'रसखान', कहा करि है जमराज बिचारो। [3]
कौन सी शंक परी है जो, माखन चाखन हारो है राखनहारो॥ [4]
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
श्रीकृष्ण की करुणा ने द्रौपदी, पतिता गणिका, अजामिल और असंख्य भक्तों को दुःख से उबार दिया। [1]
उन्होंनें महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या बाई को तारा, ध्रुव और प्रह्लाद के दुखों का भी हरण किया। [2]
हे मन, तू क्यों सोच-विचार में पड़ा है, साक्षात यमराज भी तेरा क्या बिगाड़ सकता है? [3]
श्री रसखान कहते हैं—तू क्यों शंका में पड़ा है, जब तेरी रक्षा करने वाले स्वयं माखनचोर श्रीकृष्ण हैं। [4]
द्रोपदी औ गणिका हू अजामिल, शोक हर्यो जब नेक निहारो। [1]
गौतमनारी तरी ध्रुव औ, प्रह्लादको दुक्ख हर्यो अति भारो॥ [2]
काहे को सोच करै 'रसखान', कहा करि है जमराज बिचारो। [3]
कौन सी शंक परी है जो, माखन चाखन हारो है राखनहारो॥ [4]
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
श्रीकृष्ण की करुणा ने द्रौपदी, पतिता गणिका, अजामिल और असंख्य भक्तों को दुःख से उबार दिया। [1]
उन्होंनें महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या बाई को तारा, ध्रुव और प्रह्लाद के दुखों का भी हरण किया। [2]
हे मन, तू क्यों सोच-विचार में पड़ा है, साक्षात यमराज भी तेरा क्या बिगाड़ सकता है? [3]
श्री रसखान कहते हैं—तू क्यों शंका में पड़ा है, जब तेरी रक्षा करने वाले स्वयं माखनचोर श्रीकृष्ण हैं। [4]

