जोइ भावै, सोइ करहु तुम, लता सिला द्रुम गेहु।
ग्वाल गाइ को भृत करौ, मानि सत्य ब्रत एहु॥
- श्री सूरदास, सूर सागर
ब्रह्मा जी भगवान श्री कृष्ण से कहते हैं - हे प्रभु, तुम्हें जो अच्छा लगे मुझे वही बना दो — चाहे वृंदावन की लता बना दो, यहाँ की चट्टान बना दो, यहाँ का कोई वृक्ष बना दो, यहाँ का कोई घर बना दो, यहाँ के ग्वालों और गायों का सेवक बना दो। मेरे इस संकल्प को सत्य मानो।

