मोच्छहु की माया मिटै, कटैं सकल भव-रोग।
तुम दोउन के चरन कौ, बन्यो रहे संजोग॥
- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (14.2)
मोक्ष आदि की लालसा ह्रदय से मिट जाये एवं समस्त भव रोगों का नाश हो जाय। हे श्यामा श्याम, मेरी यही इच्छा है कि तुम दोनों के चरणों का संयोग सदा बना रहे।

