श्री हरिदास अनूप अलि, रसिक रूप बलिहार।
अनमिष इकटक निरषिहीं, निरवधि नित्य-विहार॥
- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (47)
रूप सखी कहते हैं कि स्वामी श्री हरिदास जी अद्वितीय हैं, मैं उनपर बार बार बलिहार जाता हूँ। वे इक-टक श्यामा कुंजबिहारी के अखंड नित्य विहार को ही अपलक नेत्रों से निहारते रहते हैं।

