करुणा सागर लाड़िली, कृपा करौ अपनाय ।
बल बुद्धि कछु है नहीं, ना कोई चलत उपाय ॥
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (2)
हे करुणा की सागर, श्री लाड़िलीजी (श्री राधा), कृपा करके मुझे अपनाइए, क्योंकि मुझमें न तो कोई बल है, न बुद्धि, और न ही कोई अन्य उपाय (साधन) काम आ रहा है। अब मुझे केवल आपकी कृपा का ही आसरा है ।
बल बुद्धि कछु है नहीं, ना कोई चलत उपाय ॥
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (2)
हे करुणा की सागर, श्री लाड़िलीजी (श्री राधा), कृपा करके मुझे अपनाइए, क्योंकि मुझमें न तो कोई बल है, न बुद्धि, और न ही कोई अन्य उपाय (साधन) काम आ रहा है। अब मुझे केवल आपकी कृपा का ही आसरा है ।

