रसिक जन बहु ना मिले सिंह यूथ नहिं होय - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (51)

रसिक जन बहु ना मिले सिंह यूथ नहिं होय - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (51)

रसिक जन बहु ना मिले, सिंह यूथ नहिं होय।
विरह बेल जहाँ तहाँ नहीं, घट घट प्रेम न होय॥
- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (51)

रसिक संत बहुत अधिक नहीं होते (अर्थात् वे अत्यंत दुर्लभ हैं), जैसे सिंह का कोई झुंड नहीं होता। विरह रूपी बेल सब जगह प्रकट नहीं होती, और न ही घट घट में प्रेम होता है।