स्यामा स्याम पुकारती, स्यामा रटते स्याम। अली अचंभो आज बड, जुगल जपत निज नाम॥ - श्री दयाराम जी हे सखि श्याम श्यामा का और श्यामा श्याम का नाम रटा करते थे, पर आज बड़ा अचंभा देखा, दोनों अपने-अपने नाम रट रहे थे।