जब वृन्दावन धाम के प्यारे लागें रूष।
तब संपति तन भोग करि सब विधि भागी भूष॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (19)
जब श्रीधाम वृंदावन के वृक्ष लातायें-पताएँ आदि ह्रदय को प्रिय लगने लगती हैं तब समस्त सम्पति एवं भौतिक सुख तुच्छ लगते हैं और इनकी भूख स्वतः ही समाप्त हो जाती है ।
तब संपति तन भोग करि सब विधि भागी भूष॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (19)
जब श्रीधाम वृंदावन के वृक्ष लातायें-पताएँ आदि ह्रदय को प्रिय लगने लगती हैं तब समस्त सम्पति एवं भौतिक सुख तुच्छ लगते हैं और इनकी भूख स्वतः ही समाप्त हो जाती है ।

