श्रीपद अंकित ब्रज मही - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली

श्रीपद अंकित ब्रज मही - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली

श्रीपद अंकित ब्रज-मही, छवि न कही कछु जाइ ।
क्यों न रमाहूँ कौ हियो, या सुख कों ललचाइ ॥

- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली

ब्रज धाम की भूमि, श्री कृष्ण के चरण चिन्हों से अंकित है जिसकी छवि का वर्णन करना असंभव है । इस ब्रज धाम के रस का पान करने के लिए यदि स्वयं महालक्ष्मी का ह्रदय भी ललचाये, तो इसमें आश्चर्य क्या है?