आज दिवारी मंगल चार।
ब्रज जुवतिजन मंगल गावत, चौक पुरावत नंद कुमार॥ [1]
मधु मेवा पकवान मिठाई भरि भरि लीने कंचन थार।
परमानंददास को ठाकुर पहिरे आभूषन सिंगार॥ [2]
- श्री परमानन्द दास जी, परमानंद सागर
आज दीपावली का शुभ दिन है । ब्रज की युवतियाँ नंदनंदन श्रीकृष्ण के आँगन में आनंदपूर्वक मंगल गीत गा रही हैं और आँगन को सजा रही हैं। [1]
वे सोने की थालियों में विविध मिठाइयाँ, मेवे और स्वादिष्ट व्यंजन लिए हुए खड़ी हैं । श्री परमानंद दास जी के ठाकुरजी आज भव्य आभूषणों और दिव्य वस्त्रों से सुशोभित हैं। [2]
ब्रज जुवतिजन मंगल गावत, चौक पुरावत नंद कुमार॥ [1]
मधु मेवा पकवान मिठाई भरि भरि लीने कंचन थार।
परमानंददास को ठाकुर पहिरे आभूषन सिंगार॥ [2]
- श्री परमानन्द दास जी, परमानंद सागर
आज दीपावली का शुभ दिन है । ब्रज की युवतियाँ नंदनंदन श्रीकृष्ण के आँगन में आनंदपूर्वक मंगल गीत गा रही हैं और आँगन को सजा रही हैं। [1]
वे सोने की थालियों में विविध मिठाइयाँ, मेवे और स्वादिष्ट व्यंजन लिए हुए खड़ी हैं । श्री परमानंद दास जी के ठाकुरजी आज भव्य आभूषणों और दिव्य वस्त्रों से सुशोभित हैं। [2]

