मोहन नैंना आपके, नौका के आकार।
जो जन इनमें बस गये, हो गये भव से पार॥
- ब्रज के दोहे
हे मोहन श्री कृष्ण! आपके तिरछे नेत्र नौका के आकार के हैं, जो जन इसमें बस जाते हैं, वे सहज ही इस संसार सागर को पार कर जाते हैं।
जो जन इनमें बस गये, हो गये भव से पार॥
- ब्रज के दोहे
हे मोहन श्री कृष्ण! आपके तिरछे नेत्र नौका के आकार के हैं, जो जन इसमें बस जाते हैं, वे सहज ही इस संसार सागर को पार कर जाते हैं।

