जुगल भजन भींज्यौ रहै, हिये गहगह्यौ नेह।
वृन्दावन हित भक्त वह, त्रिभुवन पावन ग्रेह॥
- श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (41)
ऐसा भक्त जो सदा युगल सरकार के भजन में लीन रहता है और जिसका हृदय गूढ़ प्रेम से ओत-प्रोत रहता है, वह तीनों लोकों को पवित्र कर देता है।
वृन्दावन हित भक्त वह, त्रिभुवन पावन ग्रेह॥
- श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (41)
ऐसा भक्त जो सदा युगल सरकार के भजन में लीन रहता है और जिसका हृदय गूढ़ प्रेम से ओत-प्रोत रहता है, वह तीनों लोकों को पवित्र कर देता है।

