हौं तो जैसो, तैसो स्याम कौ।
खोटौ खरौ पर्यौ चरणन तर, चेरौ बिन ही दाम कौ॥ [1]
अंग उतीरण बसन जु धारौं, जीवन प्रभु के नाम कौ।
किशोरी स्वामिनि सेवा दैकैं, रस दरसायो धाम कौ॥ [2]
- श्री रतन अलि
मैं जैसा भी हूँ, अब श्यामसुंदर का ही हूँ। चाहे मैं खोटा हूँ या खरा, उनके चरणों में पड़ा हूँ, उनका बिना मोल का दास हूँ। [1]
जो वस्त्र वे देते हैं, वही पहनता हूँ, मेरा जीवन अब प्रभु के नाम समर्पित है। मेरी स्वामिनी श्री राधा किशोरी जू ने मुझे सेवा देकर इस श्रीधाम के रस का आस्वादन कराया है। [2]

