छकन छके जे राधिका, तिनहें न और सुहाय - श्री वंशी अलि, श्री राधिका महारास, दोहा (2)

छकन छके जे राधिका, तिनहें न और सुहाय - श्री वंशी अलि, श्री राधिका महारास, दोहा (2)

छकन छके जे राधिका, तिनहें न और सुहाय।
रसना चाखि अंगूर फल, कहा निबौरी खाय॥

- श्री वंशी अलि, श्री राधिका महारास, दोहा (2)

जो उपासक श्रीराधिका के रस में छक गए हैं, उन्हें और कोई रस सुहाता नहीं। जैसे अंगूर का स्वाद चखने के बाद कोई नीम का फल नहीं खाता।