रहा नाहिं जाये जब मिले बिनु श्यामा। तब जानो प्रेमबीज, जामा उरधामा॥ - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (64) जब श्री राधा के मिलन के बिना प्राण व्याकुल हो उठें, तब समझो की प्रेम बीज का वपन ह्रदय में हो चुका है।